पूरी नंगी चुदाई

बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी

बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी, अभी तो मैं सोई ही नही हूँ दीदी... आपकी राह देख रही थी.. आप उपर कब आईं....? पिंकी को मैने लाख समझाया था की उसको आते ही कुच्छ मत बोलना.. पर पता नही वह किस मिट्टी की बनी हुई थी.... आज के पेपर को तो भूल ही जाओ... सिर्फ़ ये दुआ करो कि तुम्हारे तीन साल बच जायें.. समझी... उसने गुर्रकार कहा...

निलू- असल में हमारे पापा ने हम बेटियों की अदला बदली करके हमारी चूदाइ करी है। उसके पापा ने मुझे और मेरे पापा ने उसकी चूदाइ की है। और ये अक्सर होते रहता है। मानव के कहते कहते सुनहरे सपनो की सजीली डोर से बँधे मीनू के हाथ अपने आप ही रैंग रैंग कर मानव के हाथों पर जाकर टिक गये... पर नज़रें मिलाने का साहस वह अब भी नही कर पा रही थी.... उसकी गर्दन एक दम लंबवत झुकी हुई थी.. होन्ट खुले हुए थे.. शायद कुच्छ बोलना चाहते होंगे.. पर बोल नही पा रहे थे.....

महोल काफ़ी गरम था, तीनों लड़कियाँ मर्दों से मज़े से चूदवा रहीं थीं और उनकी सिसकारियाँ और आऽऽहहह और हाय्य्य्य्य से वो जगह गूँज रही थी।फिर एक के बाद एक सब झड़ गए और शांत हो कर लेट गए। बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी जवाब में शालू ने भी निलू की चूत को दबा दिया, फिर दोनों कपड़े ठीक करके हँसते हुए बाहर आयीं।टेब तक राज और सरिता वहाँ से हट गए थे।फिर निलू, अंकल चलती हूँ, बाई करके चली गयी, राज उसके मटकते नितम्बों को देखता रह गया।

कल्याण में कौन सा अंक आएगा

  1. मुझे बड़ी हैरत हो रही थी.. मुझ पर इतना दुलार न्योचछवर करने वाली 'सीमा' ने मेरी मर्ज़ी तक नही पूछि.. जबकि 'वो' औरों को मानने की बात कर रही थी.... आख़िरकार मैने मौन तोड़ ही दिया...
  2. डॉली- अरे बाबा अब माफ़ भी कर दो, और अगर नही कर सकते तो जो सज़ा देना हो दे दो मुझे मंजूर है, लेकिन अब थोड़ा मुस्कुरा दो, वैसे भी कल से तुमने मुझे एक बार भी आँख नही मारी है, सन्नी डॉली की बाते सुन कर सेक्सी वीडियो कॉल में
  3. पूरी मस्तयि हुई लौंडिया है साली....! अजय ने उसकी चूचियो को पकड़ कर धक्के मारते हुए मुड़कर प्रेम की ओर देखा..... वीरू: हाँ ये तो है,शादी के बाद लड़कियों को रेग्युलर खुराक भी मिलती है ना और भी चीज़ों की। और वो दोनों हँसने लगे, अपना अपना लंड दबाकर।
  4. बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी...मुझे नही पता.. भेज दो बेशक वापस..मेरा नाम क्यूँ लोगि..? .. मैने तो...!पिंकी ने बोलते हुए मेरी ओर देखा और अचानक चुप हो गयी... चल कोई बात नही... कोई दिक्कत हो तो मुझे बता देना.. बाद में बुलाकर बात करूँगी... जा.. अब ऐश कर...! वैसे मेडम मुझे बहुत अच्छे से जानती हैं... सीमा ने जैसे ही अपनी बात पूरी की.. शिल्पा गहरी साँस लेकर कमरे से निकल गयी....
  5. सरिता- साहब बेबी अब बड़ी हो गयी है , उसकी छातियाँ बड़ी हो गई हैं, और वो हिलते हुए दिखती हैं, आप उनको ब्रा दिला दो। रूबी: हाँ एक बार सलमान अंकल का बेटा आया हुआ था तब नूरी नहीं आ सकती थी ना,तो पापा और सलमान अंकल ने मुझे रात भर चोदा था।

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तुझसे क्या कह रहा था... क्या बात हुई..? तुमने दरवाजा क्यूँ बंद किया था एक बार...? अंजलि अधीर हो रही थी.. कुच्छ मसालेदार सुन'ने को...

मैं सोनू के घर होकर आता हूँ... तब तक तुम 'ये' डाइयरी पढ़ लो.. इसमें मैने ढोलू के बयान लिख रखे हैं.. 'मैं' का मतलब ढोलू समझना... मानव ने खड़ा होकर डाइयरी मेरे हाथों में पकडाई और वहाँ से चला गया.... हेलो मिश्रा... इनस्पेक्टर मानव हियर.... जल्दी से इस नंबर. को ट्रेस करने की कोशिश करो... जितनी जल्दी हो सके उतनी.... हरी उप! मानव ने हड़बड़ी में ग़लत नंबर. लिखवा दिया.... उसके बाद उसने तुरंत मीनू के मोबाइल पर फोन किया...,हेलो मीनू! गुरुकुल का कोई नंबर. है क्या?

बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी,तरुण उसकी जांघों को छ्चोड़ कर उपर गया और मीनू के होंटो को चूम लिया, तुम्हारी कसम जान.. तुमसे दूर होने की बात तो मैं सोच भी नही सकता... तरुण ने कहा और नीचे आ गया...

हाँ.. दिल लगने में क्या दिक्कत है... हम दोनो तो साथ रहेंगे ही... पिंकी के कहते कहते ही उनका घर आ गया था...

ओह्ह.. रो क्यूँ रही है यार... कुच्छ हुआ तो नही ना... मैने आगे होकर पिंकी के आँसू पौंचछते हुए कहा..,फिर क्या हुआ?भोजपुरी हिंदी सेक्सी फिल्म

अब मैंने उसके पैरों मेंदवाई लगाई और फिर वो जाँघ खुजाने लगी तो मैंने उसका स्कर्ट ऊपर किया और उसकी पैंटी तक दिखने लगी। उसकी गदरायी और मुलायम जाँघों पर दवाई लगाते हुए मेरी नज़र उसकी पैंटी पर पड़ी। ख़तम होने के बाद दोनो अपने घर आ गये, रात को डॉली अपने रूम मे लेटी हुई किताब पढ़ रही थी और अंजलि और सन्नी टीवी देख रहे थे, सन्नी अपनी मम्मी के बगल मे बैठा हुआ अपनी मम्मी की मोटी मोटी जाँघो को मसल रहा था, सन्नी- मम्मी आज बहुत मन कर रहा है,

तो क्या हो गया..? तुम मेरे पास हो यार... ये गुरुकुल मेरे बाप का है.... सीमा ने छाती चौड़ी करके बताया... अगर तुम मेरे साथ हो तो किसी से डरने की ज़रूरत नही.... समझी!

उसकी चूची पर हथेली टिकाए हुए मुझे ऐसा आभास हो रहा था जैसे मैने अपने हाथों में 'छ्होटे' आकर का कश्मीरी सेब थाम रखा हो.. बेहद मुलायम, मखमली और रेशमी अहसास लिए उसकी चूची तेज़ी से उपर नीचे होती हुई धीरे धीरे अकड़ने सी लगी और जल्द ही मुझे मेरी हथेली में उसकी चूची का 'मिश्रीदाना' महसूस होने लगा...,बुद्ध पौर्णिमा माहिती मराठी पिंकी अपने पापा से नज़रें मिलने का साहस नही कर पा रही थी... आख़िरकार हॉस्टिल से बाहर तो 'वो' अपनी मर्ज़ी से ही आई थी ना.... अपने पापा के तेवर देख पिंकी मानव के पिछे ही च्छुपकर खड़ी रही.....

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