संक्रांति कशावर बसली आहे

राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग

राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग, मेरे सामने कर लेगी मूत तो तेरा क्या बिगड़ जाएगा. वैसे भी तेरी गांद मैं देख ही चुका हूँ. कर ले ज़्यादा शर्मा मत. तुझे जैसा मैं कहूं वैसा ही करना मैं तुझे नजारा दिखाऊंगा लेकिन तू वहां पर जरा भी आवाज मत करना बस शांति से देखते रहना नजारा देखकर तु एक दम मस्त हो जाएगा,,,

3,,,,, रितु चाची यह पूनम की सबसे छोटी चाची थी। एकदम मॉर्डन टाइप की उसके बदन पर चर्बी का कहीं भी नामोनिशान नहीं था,,,, कपड़े भी एकदम स्टाइलिस पहनती थी। समीर अब वो रेकॉर्डिंग डेलीट कर दो….तुम जो चाहते थे वो तुम्हें मिल गया… अब सब कुछ भूल जाओ….और एक नयी जिंदगी की शुरआत करो….कि तुम भी सकून भरी जिंदगी जी सको और में भी…..

मैं भी रानी की बातें सुन कर जोश में आ गया….और अपना पूरा लंड निकाल-2 कर अपनी रानी की फुद्दि में शॉट लगाने लगा…रानी एक दम मस्त हो गयी….और अपनी बुन्द को पीछे की ओर धकेलने लगी…. राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग फिर वो उठा और एक झटके मे उसने सारे कपड़े निकाल दिए और लंड को चूत के छेद पर रखा और एक ही धक्के मे लंड पूरा अंदर डाल दिया, उसका लंड कुछ ज़्यादा ही लंबा था सीधा मेरी बच्चेड़नी से जा टकराया और दर्द की एक मजेदार लहर मेरे बदन मे दौड़ गयी.

ಸೆಕ್ಸ್ ವೀಡಿಯೊ ಪ್ಲೇಯರ್

  1. मेरी आँखें डॉली के चेहरे को देख रही थीं, वो शायद शर्म की वजह से अपनी आँखें बंद किए थी। पर मुझे उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं दिखा तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
  2. तू भी, सजल… झड़ बेटा झड़, तेरी मम्मी को तेरा पानी चाहिये… भर दे उससे मेरी चूत… मैं झड़ रही हूँ। प्रमोद भी… तू भी आ… आज का मौसम का हाल क्या रहेगा
  3. अपने शौहर को मुझ से बे परवाह हो कर अपनी आँखों के सामने एक दूसरी औरत के साथ हम बिस्तरी करते देख कर मुझे एक लम्हे के लिए बहुत दुख हुआ. ललिता थोड़ी देर बाद कमरे में आई, वो अपने बदन को केवल एक तौलिये से ढके थी, कमरे में आते ही वो अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ गई और तौलिया हटा दिया।
  4. राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग...इस दर'बार की मान मर्यादा बचाने के लिए आप'का बहुत बहुत धन्यवाद. फिर भी मेरी उत्सुक'ता यह जान'ने के लिए बढ़ी जा रही है कि जिसे हट्टे कट्टे राजपूत नहीं कर सके वो आप किस तरह कर पाए. लेकिन मेरे जिस्म के हर हिस्से को पूरा नंगा देखने के बावजूद यासिर ने मेरे जिस्म के किसी भी नंगे हिस्से की इस तरह के अल्फ़ाज़ में कभी तारीफ नही की थी. जिस तरह के नंगे अल्फ़ाज़ में विनोद इस वक्त कर रहा था.
  5. उसके मुँह से भी उफ़फ्फ़....आअहह....यअहह....चूऊवसो..और चूसो...जैसे शब्द निकल रहे थे. अब मैं चुचियों को छ्चोड़ कर नीचे बढ़ा. उस की नाभि बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. अपनी ज़ुबान उसमे डाल कर मैं उसे चूसने लगा. वह तो एक्सिटमेंट से तड़प हां बना ही लो… नजीबा मेरी बात सुन कर बाहर जाने लगी तो, मैने दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा…मुझे टाइम सही से दिखाई नही दे रहा था…शायद अभी अभी सो कर उठने की वजह से….नजीबा….

हरदोई ग्राम प्रधान आरक्षण लिस्ट २०२१

मगर वो नही माना. उसने तो झटके मारने शुरू कर दिए. मैं बेबस सी पड़ी रही. वो अब मज़े से मेरी मार रहा था. उसके बोझ के नीचे मैं मरी जा रही थी.

.पहले ही अपने जीभ और दांतो से मुझे इतना घायल कर दिया था और अब इसको भी एक झटके घुस्साअ दिया.और ये सब कहते हुए अपने मूह से ज़ोर-ज़ोर से कुच्छ बड़बड़ाती हुई वैशाली अपनी कमर को उचकाने लगी.कमरे मे थ्वप-थ्वप की आवाज़े गूंजने लगी और कमरे का तापमान बढ़ने लगा. नाज़िया की अम्मी ने जब मेरी तरफ स्माइल करते हुए देखा….तो नाज़िया ने चोंक कर सबा की तरफ देखा….नही… ज़ाकिया ने स्माइल करते हुए कहा…

राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग,दोस्तो आपके लिए तुषार की एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो वैसे तो मैं तुषार की 2 कहानियाँ चन्डीमल हलवाई..

नाज़िया मेरी बात सुन कर एक दम से रुक गयी….मेरा लंड उसकी फुद्दि में पूरा घुसा हुआ था…समीर प्लीज़ फिर से वही बात ना दुहराओ….ये पासिबल नही है…. नाज़िया ने फिर से ऊपेर नीचे होना शुरू कर दिया…

मनीषा ने अपना मुँह फिर से सुनील के लण्ड की ओर बढ़ाया- मुझे खुशी है कि तुम मुझे फिर से चोदने के लिये आओगे। पर हम अभी पूरी तरह से फ़ारिग कहाँ हुए हैं… अभी तो मुझे यह जानदार लौड़ा अपनी चूत में अंदर डलवाना है… यह कहते हुए सुनील का लण्ड मनीषा ने वापस अपने मुँह में डाल लिया।सपने में छछुंदर देखना

मनीषा ने भी धक्कों में हाथ बंटाया और उसके लण्ड पर तेजी से सरकने लगी। कभी सजल नीचे से धक्का देता तो कभी मनीषा ऊपर से अपनी चूत को उसके लण्ड पर बैठाती। नाज़िया अब एक दम गरम हो चुकी थी…उसके हाथ पैर उतेज्ना के मारे काँप रहे थे….और वो अब पूरी तरहा अपने होंठो को खोल कर चुस्वा रही थी….और मैं नाज़िया के होंठो को बहुत ही मस्ती के साथ चूसे जा रहा था……नाज़िया की फुद्दि के लिप्स अब फड़कने लगे थी….

मनोज कल्पना की दुनिया से बाहर आया तो देखा कि उसकी चादर उसके अलावा से गीली हो चुकी है उसका हाथ भी गीला हो चुका था।

चाची: (मेरे गले में बाहों को डाल कर मेरे होंठो को चूमते हुए) उस दर्द को जो तुमने मुझ को दिया है....पता है अभी भी दर्द हो रहा है....ऐसा लग रहा है....जैसे वो खुल गया है....,राष्ट्रीय मागासवर्गीय आयोग उनके अभी कोई बच्चा नहीं था शायद फेमिली प्लानिंग अपना रखी थी, उनके पति एक सरकारी फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम करते हैं, उनके पति हालांकि उम्र में मौसी से सीनियर हैं मगर बहुत ही आकर्षक और स्वस्थ ब्यक्ति हैं,

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